Feziya khan

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धीरे धीरे से भाग --- 25




कुछ दिनों बाद वीर के मम्मी पापा दीप्ती के घर आए उन्होंने अब शादी की बात रखी दीप्ती की माँ ने भी हामी भी दी,,,


दीप्ती के पेपर हो चुके थे अभी रिजल्ट नहीं आया था उन्होंने सोचा और कितना पढ़ेगी ये ही सही मौका है दीप्ती और रवि की शादी का अब दीप्ती को अपनी गृहस्ती मे पड़ जाना चाहिए उन्हें भी कही ना कही ये डर हमेशा सताता रहता की कही दीप्ती भी और लड़कियों की तरफ मोहब्बत मे ना पड़ जाए अगर ऐसा हो गया तो वो लोगो को क्या मुँह दिखागे दीप्ती की माँ अक्सर दीप्ती पर नज़र बनाये रखती थी उसकी हरकतो पर,,



कभी उन्हें अपनी बेटी मे ये विरोध नज़र नहीं आया की वो अपने माता पिता से बगावत करेंगी आगे कभी ये ना हो जाए इसलिए वो दोनों चाहते थे की अपने घर की हो जाए,,,,,



दीप्ती की शादी की तैयारी बड़ी जोरोशोरो से चल रहीं थी दीप्ती ने भी बिना ना नुकर किये इस रिश्ते को कबूल कार लिया था वीर का अच्छा पन उसे आज भी याद है वो तो दीप्ती थी की उससे अलग होना चाहती थी उसकी तो कोई गलती ही नहीं थी,,,,



दीप्ती को अब अपनी गलती का एहसास हो रहा था उसने वीर के साथ अच्छा नहीं किया इतना सीधा लड़का उसे कहा मिलेगा इतना सब होने के बाद भी वीर ने किसी से कुछ नहीं कहा और उससे शादी भी कर रहा है,,,,,,


धीरे धीरे शादी के दिन नजदीक आते गए शादी से पहले एक लड़की के मन में कई सवाल आते है दीप्ती के भी आये पर वीर के प्यार और दोस्ती वाले बर्ताव से दीप्ती बहुत सुकून में थी, पर कभी कभी आने मे और रहने मे फर्क होता है वीर के घर वालो को जानती थी पर इतना भी नहीं पता नहीं साथ रहने पर कैसे निकले सब वो वहाँ सब से घुलमिल भी पायेगी की नहीं वीर कही बाद मे बदल तो नहीं जायेगा जैसा प्यार वो अब करता है वैसे ही करेगा उसका साथ हमेशा तो देगा वगैरह वगैरह,,,,,, 


कल मेरा अच्छा ही होगा मुझे इतना अच्छा साथी जो मिला है क्या क्या तू भी ना दीप्ती सोचती ही रहती है,,,, अपने सर पर टपली मरती है,,,



जैसे जैसे शादी के दिन नज़दीक आ रहे थे वैसे वैसे दीप्ती की दिल की धड़कने बढ़ती ही जा रहीं थी दीप्ती की गलती की पता नहीं क्या सजा देगा वीर मन ही मन दीप्ती डर रहीं थी,,,,



शादी का दिन भी आ गया दीप्ती सजी धजी बहुत ही प्यारी लग रहीं थी सभी उसकी तारीफ कर रहे थे लाल सुर्ख जोड़ा दीप्ती पर खूब फव रहा था 



बहुत धूम धाम से दीप्ती की शादी हुई वीर को और उसके घर वालो को बहुत कुछ मिला था दीप्ती के घर से,,,,,



दीप्ती को थोड़ा दुख था तो रिया का जो उसकी शादी मे नहीं आई थी मोहन और सिद्धांथ का तो दीप्ती का पता था की वो उसकी शादी मे नहीं आएंगे मोहन को बहुत दुख होगा दीप्ती को अपनी आँखो के सामने किसी और का होते हुए देखना,,,



दीप्ती अपने सुसराल पहुंची सभी रस्मे पूरी होने के बाद दीप्ती को तैयार कर के वीर के कमरे मे ले जाया गया वहाँ उसकी और वीर की विडिओ बनाई गई सब होने के बाद दीप्ती ने अपने ज़ेवर उतारे और पलंग पर लेट गई,,,,


वीर मुस्कुराता हुआ उसके पास ही लेट गया दीप्ती थोड़ी घबराइए और उससे दूर हो गई वीर मुस्कुराया,,,


वीर बोला,, क्यों अभी भी मुझ से दूर रहना है तुम्हे अब तो शादी भी हो गई है अब  दुरी क्यों,,,



दीप्ती बोली,,, शादी हो गई है इसलिए तुम यहाँ हो नहीं तो,,,


वीर ने उसे रोकते हुए बोला, हाँ जानता हूँ नहीं तो तुमने तो मुझे दूर भेजनें के सारे इंतजाम कर लिए थे,,,


दीप्ती ने बड़ी ही हैरानी से उसे देखा तो वीर बोला,,, जानता हूँ सब जो उस दिन तुम ने अपने प्यार के झूठे किस्से मुझे सुनाये थे पर ज़ब कुछ बोला नहीं था चुपचाप चला गया था ये सोचकर की तुम्हे शायद मै पसंद नहीं हूँ इसलिए तुम ये सब कर रहीं हो मेरा दूर जाना ही सही था उस समय अगर किस्मत ने हमें मिलाना होगा तो मिला देगी नहीं तो कोई नहीं एक हसीन सपना समझ कर तुम्हे भूल जानूंगा पर देखो आज तुम मेरे साथ एक ही कमरे मे एक ही बिस्तर पर हो,,,


ये कहते हुए वीर ने दीप्ती का हाथ पकड़ कर चूम लिया दीप्ती खुद मे ही सिमट गई,,, वीर की इस हरकत पर,,,,



दीप्ती को ऐसे सिमटते हुए देख कर वीर ने आगे बढ़ कर दीप्ती के गालों को चूमने के लिए बड़ा तो दीप्ती ने उसे रोक दिया,,,, ये क्या कर रहे हो पागल हो क्या,,


वीर बोला पागल पर क्यों ये मेरा हक़ है अब तुम मेरी हो अब मैंने तो अभी कुछ किया भी नहीं और तुम इसमें ही डर रहीं हो,,,,



दीप्ती बोली,, देखो वीर ये सब नहीं करना रात बहुत हो गई है तुम भी सौ जाओ और मुझे भी सोने दो बहुत देर भी हो गई है 


और दूसरी बात मुझे अभी बच्चे नहीं चाहिए तो ये किश विश ना करो मुझे,,,



वीर जोर से हंसा और बोला ये तुम से किसने कहा की किश करने से बच्चे होते है क्या तुम्हे किसी ने नहीं बताया की??



आज हमारी सुहागरात है तो आज तो मै तुम्हे नहीं छोड़ सकता जो मुझे करना है वो करूँगा ही,,,,



दीप्ती बोली देखो वीर पहली रात है हमारी सुसराल मे इसलिए और तुम्हारे साथ इसलिए इसको सुहागरात बोलते है,,,



वीर ने अपना सर पकड़ लिया ये पता है तुम्हे  आज रात के बारे मे और कुछ नहीं


दीप्ती ने भी बड़ी ही मासूमियत से सर हिला दिया



वीर बोला मुझे लगता है तुम्हे सब सीखना पड़ेगा ये कह कर उसने दीप्ती की कमर मे हाथ डाला और उसे अपनी हो खींच लिया,,,

 


वीर के हाथ उसकी पीठ से फिसलते हुए उसके बालों मे उलझ गए और उसके बालों को थोड़ा खींचा। आह्ह.. दीप्ति का फेस थोड़ा ऊपर हो गया और वीर ने उसके होठों पर अपने होठ रखे और उसे वाइल्ड किस करने लगा। 


दीप्ति झटपटाने लगी। लेकिन वीर तो उसे सांस लेने का मौका नहीं दे रहा था।  लेकिन इस बीच दोनों का किस ब्रेक नहीं हुआ। 


दीप्ति ने अपना फेस साइड किया और गहरी गहरी सासे भरने लगी। दीप्ती के होठों से ब्लड आने लगा था। वीर ने अपने हाथों में उसका फेस देख लिया और दोबारा उसके होठों को बेरहमी से शक करने लगा। 



दीप्ति की सासे असामान्य थी। वीर उसकी कॉलर बोन पर किस कर रहा था सा ही अपने दूसरे हाथ से उसकी ब्रा  को निकाल रहा था। वीर में बेहरेमी से उतार कर ब्रा बेड के नीचे फैंक दी, और उसके breast को देखने लगा। वीर ने उसके ब्रेस्ट पर अपने होंठ रखे और suck करने लगा। दीप्ति ने अपने दांतो से अपने कांपते होठो दबा दिया। उसकी आंखों से आसू निकल रहे थे। वीर ने दीप्ति के breast press किया और दीप्ति की आह निकल गई। 

वीर के फेस पर तिरछी स्माइल आ गई। वो नीचे की तरफ बढ़ने लगा। 


वीर ने दीप्ति के पैरो को spread किया और उसकी softness को देखने और उस पर हाथ फैरने लगा। दिप्ती अपने पैरो को जोङने लगी। 


तभी वीर ने गुस्से से कहा" तुम मुझे रोकने की कोशिश कर रही हो, और गुस्से में उसने दीप्ति को 2 थपड़ मार दिया6।



वीर ने दीप्ति के थाइस पर पकङ कस दी। 




उसकी बॉडी पर वाइल्डली किस करने लगा। वो अपना कंट्रोल खो चुका था। वीर के होंठ उसके उभारो से होते हुए नीचे फिसलने लगे।


 वीर ने उसके बचे कुछ कपड़े भी बैड के नीचे फेंक दिए,  


दीप्ति को समझ आ रहा था की अब क्या होने वाला है। 

वीर ने उसके एक पैर को कंधे पर रखा और उसके अंदर झटके से एंटर हो गया। दीप्ति की चीख निकल गई और आंसू छल उठे। उसे तकलीफ में देखकर वीर को सुकून मिल रहा था। 


दीप्ती ने धीरे से कहा" वीर दर्द हो रहा है, वीर फिर बाहर आया और उसके बाद उनती ही फोर्स के साथ इंटर हो गया। 


दीप्ति के होठ कांपने लगे। वीर गहराई तक उसके अंदर समा गया था। 

दिप्ती के आंखो के कोने बहने लगे। 


वीर अपनी वेस्ट मूव करने लगा। ऊपर चल रहे फैन को देख रही थी कि सब जल्दी खत्म हो जाए। 

वीर ने दीप्ति के ब्रेस्ट को इंटिमेट होते हुए press किया। 



वीर ने दीप्ति को घुमा दिया और उसके अंदर इंटर हो गया। दीप्ति के होठ थरथर कांप रहे थे। वीर ने उसकी बेक पर किस किया और पैशनेट होकर बाइट करने लगा। 


दीप्ति ने ब्लैंकेट अपनी मुट्ठी में भर लिया। वीर ने अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर रखे और इंटीमेट होते हुए उसके बाल पकङ लिए और फिर झुक कर दीप्ति के कान मे बोला" मुझे तुम्हारी आवाज सुनाई नही दे रही है।

दिप्ती ने अपने हाथों से अपने मुंह को दबा रखा था ताकि वह उसकी चीख ना निकले। 




  इंटिमेट रहा था।  दीप्ति कराह रही थी। 



दीप्ती वीर के इतने करीब होने पर बहुत डर गई उसका शरीर ठंडा पड़ गया था उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की ये उसके साथ क्या हो रहा है वीर ने धीरे धीरे दीप्ती के शरीर पर अपने हाथ घुमाने शुरू कर दिए थे दीप्ती उससे दूर होती तो वीर उसे और अपने करीब कर लेता दीप्ती छटपटती रहीं उसकी बाहों मे उसकी आँखो से आँसू की धाराएं बह रहीं थी पर वीर था की उसे उसके ऊपर बिल्कुल भी रहम नहीं आ रहा था दीप्ती की साँसे जैसे अब रुक ही जाएँगी ये उसके साथ क्या हो रहा है उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था


 वीर इतना निर्दयी भी हो सकता है उसे इस बात का गुमान ही नहीं था,,,,,



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1 Comments

Mohammed urooj khan

16-Oct-2023 12:00 PM

👌👌👌👌

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